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Sunday, 22 July 2012

राजनीती


  राजनीती राजनीती राजनीती राजनीती ............
कोई हरा जीता कोई मर कर भी आया हे
कोई सच्चा कोई झूठा कोई लड़ कर भी आया हे 
मिला क्या देश को मेरे सिवा गम ही तो पाया हे

राजनीती राजनीती राजनीती राजनीती ...........
कभी यहाँ पक्ष कभी विपक्ष सभी ने मिल के खाया हे
सत्ता के लड़ाई थी और जनता को रुलाया हे 
मिला क्या देश को मेरे सिवा गम ही तो पाया हे

राजनीती राजनीती राजनीती राजनीती ...........
कभी अनसन कभी रेली किसी ने कुछ ना पाया हे 
पूछो जो महगाई के बारे कोई कुछ कह ना पाया हे 
मिला क्या देश को मेरे सिवा गम ही तो पाया हे

राजनीती राजनीती राजनीती राजनीती ...........
कभी सीटे कभी वोटे इन्ही का दोर आया हे 
खड़ा कोई जो तो हुआ जमी पर भी गिराया हे  
मिला क्या देश को मेरे सिवा गम ही तो पाया हे

राजनीती राजनीती राजनीती राजनीती ...........
साधुओ ने संतो ने जो अपना हाथ बढाया हे 
उनका हाथ उन्ही के हाथ में काट थमाया हे 
मिला क्या देश को मेरे सिवा गम ही तो पाया हे

राजनीती राजनीती राजनीती राजनीती ...........
सोचता हु जब इस बारे में तो आँखों को नम ही पाया हे
जो कुछ करता नहीं तो कुछ कहने का हक़ भी गया हे  
मिला क्या देश को मेरे सिवा गम ही तो पाया हे

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