Pages

Friday, 27 July 2012

पागलो के सिवा बेवजह अब मुस्कुराता कोंन हे ?



पागलो के सिवा बेवजह अब मुस्कुराता कोंन हे ?
गेरो के दर्दो में अपनी पलके भीगता कोंन हे ?
गम किसी काँधे सर रख रोने से कम होता हे 
पर बिन जान पहचान अब गले से लगता कोंन हे ?

फिसलने की उम्र में , में भी फिसला आखिर क्या करता 
अब हाथ की ऊँगली पकड़ चलना सिखाता कोंन हे ?

बचपन में रेत के बहुत आशियाने बनाया करता था में 
अब सपनो में भी रेत के घर बनाता कोंन हे ?

शर्म लिहाज तो गहेने थे मेरे देश के
पर अब बड़ो के आगे भी अब शर्माता कोंन हे ?

अपने बुजुर्गो के आखिर केसे शर्म करेंगे लोग 
खुदा के सामने भी अब नजरे झुकता कोंन हे ?

नशे में धुत रहने के लिए मेंखाने जाने की झेहमत उठानी पड़ती हे 
आखिर अब नजरो से जाम पिलाता कोंन हे ?

जरुरत नहीं गंगा स्नान की गली की कीचड़ काफी हे
पर आखिर अब सच्चे मन से नहाता कोंन हे ?


सात जन्मो का तो वादा कर लिया करते हे लोगपर एक जन्म भी मरते दम तक साथ निभाता कोन हे ?

आशिक तो बहुत सच्चे हे आज भी लेकिन 
आखिर उनकी आशिकी को अब अजमाता कोंन हे ?

सबने की बेकद्री मेरी तुने मुझको समझा
तेरे सिवा इस जहा में और मुझको चाहता कोंन हे ?


क्यों कह रहे हो तुम मुझको बेहया 
आखिर अब अपनी आबरू बचाता कोंन हे ?

दुसरो से इतने सवाल करने की हिम्मत की मेने भी
पर खुद से खुद ये सवाल पूछ पाता कोंन हे ?

Wednesday, 25 July 2012

बेसक जिन्दगी की हर जद्दो जहेद से गुजर के आ

 बेसक जिन्दगी की हर जद्दो जहेद से गुजर के 
पर घर से जब भी निकल अश्क पोछ और सवंर के 

आफताब को पश्चिम में डूबे बहुत वक्त हुआ
  चाँद शर्म कर अब तो बदलो  से उभर के 

बहुत साल होस में रहा तू मेखाने में रहकर भी
कम से कम अब तो खुद को बेहोश कर के 

जिन्दगी में हार जीत के कुछ मायने नहीं होते
बस जिन्दगी की  हर जंग तू नियत से लड़कर के 

मोत तू तुझे छुने से पहले हजार बार सोच लेगी
बस तू एक बार मोत की आँखों में आंखे डाल कर के 

कहा चले गए वो परिंदा जो कल तक मेरे हुआ करते थे
अगर आज भी हे मेरा तो में पास लोट कर के आ

लगता हे मेरी तहरीर अब तेरी समझ से बाहर हे
जा कही से माथे की सिकंद पड़ना समझ कर के 

बहुत साल उस चोराहे पर तेरा इंतजार किया मेने
मुझसे मिलना हे तो वही मेरा इंतजार कर के

शायद मेरी किस्मत लिखते वक्त कलम ने दम तोड़ दिया
जा कही से उस कलम में इख्लाश भर कर के आ

यु तो मेरी जिन्दगी एक खुली किताब के माफिक हे
लकिन तू उन कोरे पन्नो को दिल से पड़ कर के आ

तुझे क्या लगा तेरे दिए जख्म यु ही भुला दूंगा
नहीं पहले मेरे आसुओ का  समंदर पर कर के आ

तू मुझे देख देख इतना क्यों मुस्कुराती हे


तू मुझे देख देख इतना क्यों मुस्कुराती हे
याद रख मेरी ये आंखे बहुत जज्बाती हे

तू तो बस सोचती हे रुखसत होने के बारे में तुझे क्या पता
ये आंखे इस गम में कितने आंशु बहती हे

अब तो मेरी पलके भी तुझसे परेसान हो गई
क्योकि ये जानती हे तू ही जो मुझे रुलाती हे

दिल से नजर तक सब अश्को की महफ़िल लगा लेते हे
जब जब इस पत्थर जेसे दिल को तेरी याद आती हे

दिल तोड़कर मेरा चेहरा तो तेरा भी उदास हे
हा में जनता हु अपनी गलती पर तू कितना पछताती हे

तेरी  खातिर दर्द में भी मुस्कुराया करता हु में
देख ले ये मोहब्बत आखिर क्या क्या करवाती हे

अपनी जिन्दगी की हर साँस तेरे नाम कर दी मेने
और बता आखिर तू मुझसे और क्या चाहती हे

कभी वक्त मिले मेरे अन्दर झाक कर देखना
तुझसे बिछड़ने की पीर मुझे अन्दर ही अंदर खाती हे

मंदिर  मजीद हर जगह इल्तजा किया करता हु खुदा से
फिर क्यों हर बार तू मिलने से पहले बिछड़ जाती ह

Sunday, 22 July 2012

अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु


जिनके दिलो में जगह नहीं उनसे मकान  पूछता हु
आखिर में किन अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु

जिन्होंने अपने मतलब के लिए सदा ही घोपे खंजर
जिनके खेत हरे होकर भी धरतिया सदा ही थी बंजर
जो कभी किसी को एक भी दाना दान नहीं करते
जो अपने आगे उस खुदा का भी गुणगान नहीं करते
पागल हु जो उनके दिलो में खुद के लिए सम्मान पूछता हु
आखिर में किन अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु

जिन्होंने रस्ते के दख्त काट सरो से छीन ली छाया
जिन्होंने सिवा रकाफतो के अब तक कुछ ना कमाया
ले रहे देखो जहा भाई अपने भाई की जान
जो नहीं समझते हिन्दू मुस्लिम एक समान
पागल हु जो एक हिन्दू  से में अजान पूछता हु
आखिर में किन अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु

जो कभी उस सहीद दिवस पर आंखे नम नहीं करते
किसी के जले पर जो कभी मरहम नही भरते
जो नहीं रखते किसी के जीने या मरने से ताल्लुक
जो खुद ही छोड़ के जाना चाहते हे अपना मुल्क
पागल हु जो उनसे उनके मुल्क का नाम हिंदुस्तान पूछता हु
आखिर में किन अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु

सत्यमेव जयते


 
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते

जान बुझकर चूमी जिस माँ के लाल ने फासी
करता हु में नमन तुझको भगत सिंह सन्यासी
जिसने आजादी को  बनाया था अपनी दुल्हन
जो निकल पड़ा सर पर बाधे मोत का कफ़न
अच्छे लगते अगर वो कहते
सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते

जिनका ना हे सच से दूर दूर तक वास्ता
जो हस्ते सुनकर हम गरीबो की दस्ता
जिन्होंने पास किये संसद में एसे एसे बिल
जिनकी नहीं कोई तय भ्रस्ट होने की मंजिल
अब तो वो भी ना थकते कहते
सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते


एक वो थे जो गए सच के चक्कर में मारे
बन्दूक के आगे चला अपनी  लाठी भी ना हारे
फिरंगियों को उड़ा ले गई आयी थी जब वो आंधी
सलाम हे तुझको मेरा मोहनदास करमचंद गाँधी
अच्छे लगते अगर वो कहते
सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते


जो अपने फायदे के लिए हाथ फेलाते हे
चुनाव आने पर झूठे वादे जो कर जाते हे
जिनको नहीं आयी कभी अपनी कुर्सी रास
सदा भुझाते जो दुसरे के कुओ से प्यास
अब तो वो भी ना थकते कहते
सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी


एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी , एक तरफ़ा इबादत मेरी

देख के मेरे दिल की हालत आंख खुदा की भर आयी
नजाने कब जुड़ा था रिश्ता जो तू हुई परायी
खोट ना कुछ भी तेरा इसमें खता हे सारी मेरी
जुबा से कुछ में कह ना सका और राह ताकि क्यों तेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
मेरी मोहब्बत में दिल टुटा या ना टुटा मेरा
खुश फिर इस बात के दिल ना दुख हे तेरा
मेरा क्या रो रो कर जिन्दगी कट जाएगी मेरी
जुबा से कुछ में कह ना सका और राह ताकि क्यों तेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
तुझको चाहा खुद की बेकद्री कर दी क्या मेने
कब तक रोकू इन अश्को को अब तो लगे बहने
अश्को में जो आये नजर तो खता ना होगी मेरी
जुबा से कुछ में कह ना सका और राह ताकि क्यों तेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
कर बेठा तेरा में इतना इंतजार क्यू
इतने चेहरों में आया तेरे ऊपर प्यार क्यू
सोच सोच अब हो गई आंखे नम मेरी
जुबा से कुछ में कह ना सका और राह ताकि क्यों तेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी

बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे


बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे

मेरे दिल में तेरा चेहरा तेरे दिल में रहता कोई और हे
मत घबरा तू इतना ये बस मेरे टूटे दिल का शोर हे
मेरा क्या तुझको हस्ता देख कर ही हस लूँगा
ना आये तू नजर आँखों इस पट्टी भी कस लूँगा
पर आंखे बंद कर भीं दिखाई तू देती यही परेशानी हे

बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे

तू बस दो बाते हसकर कर ले दिल खुस हो जाता मेरा
थोड़ी सी खुसी मुझको देने में आखिर क्या जाता हे तेरा
अपने दिल में थोड़ी जगह मेरे लिए भी बनाले
इतने सपनो में कुछ सपने साथ मेरे भी सजले
मत कर गुमान किसी बात का दो पल की जिंदगानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे

केसे तुझको बतलाऊ आखिर कितना तुझसे हे प्यार
तू मांगे अगर जान मेरी तो जान भी दूंगा में  वार
सोते जागते बस तेरा ही मन मेरे हे ख्याल
खुद से खुद अक्सर किया करता हु ये सवाल
के जब इतनी मोहब्बत हे तो क्यों कही ना जुबानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे


वो तुझसे करता नहीं मोहब्बत तुझसे वो खेल रहा हे
और दूसरी तरफ तेरे लिए कोई कितना दुःख झेल रहा हे
प्यार करना हमेसा उससे जो तुझसे प्यार करता हो
तेरे दुःख पर अपनी सारी खुसिया निसार करता हो
में सच्चा दीवाना तेरा पर फिर भी तू उसकी दीवानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे